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PIL for Dissolution of Municipalities in Schedule Areas

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एक ऐतिहासिक कानूनी कदम—आदिवासी स्वशासन की पुनर्स्थापना के लिए

7 जुलाई 2025 में दायर इस ऐतिहासिक जनहित याचिका (PIL) में झारखंड के वरिष्ठ आदिवासी कार्यकर्ता रोबर्ट पी मिंज  ने अनुसूचित क्षेत्रों में नगरपालिकाओं के गठन और संचालन को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243ZC, पाँचवी अनुसूची, और PESA कानून 1996 के घोर उल्लंघन को चुनौती दी है।

यह पुस्तक आपको याचिका की पूर्ण प्रति और उसके संवैधानिक आधारों की गहराई से जानकारी देती है। इसमें बताया गया है:

·         कैसे शहरी निकायों ने पारंपरिक ग्राम सभा आधारित शासन को अवैध रूप से हटा दिया है।

·         क्यों अनुसूचित क्षेत्रों में नगरपालिकाएं असंवैधानिक हैं।

·         याचिका में क्या माँगे रखी गई है? जिनमें शामिल है – इन नगरपालिकाओं को तुरंत भंग करना और  उनकी जगह PESA के तहत पारम्परिक आदिवासी स्वशासन व्यवस्था को बहाल करना

यह पुस्तक अंग्रेज़ी में है, लेकिन यह हर उन पाठकों के लिए जरूरी है जो आदिवासी अधिकारों, संविधान और न्याय में रुचि रखते हैं।

📘 इस पुस्तक को खरीदकर आप न सिर्फ ज्ञान प्राप्त होगी, बल्कि लेखक की इस महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाई में महत्वपूर्ण सहयोगी और सहभागी की भूमिका भी अदा करेंगे, जो झारखंड के आदिवासी समुदायों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ी जा रही है।

 

 

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a pdf file of PIL filed in Jharkhand High Court on 7-07-2025

Pages 12
199
Size
594 KB
Length
13 pages
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